- उज्जैन महाकाल मंदिर में अलौकिक सुबह: चांदी के पट खुले, भस्म आरती में गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक के बाद भस्म चढ़ी, गूंजा ‘जय श्री महाकाल’
- महाकुंभ जैसा होगा सिंहस्थ 2028, पार्किंग स्थलों का हुआ निरीक्षण: अधिकारियों के जारी किए निर्देश, कहा - घाट तक आसान पहुंच पर जोर
- महाकाल मंदिर पहुंचे मिलिंद सोमन और नितीश राणा: भस्म आरती में हुए शामिल, 2 घंटे नंदी हॉल में किया जाप
- तड़के महाकाल के कान में स्वस्ति वाचन, फिर खुला चांदी का पट! भस्म अर्पण के बाद साकार रूप में दर्शन
268 साल पुरानी परंपरा:गवली समाज के युवाओं ने लाठियों से पीटकर किया घमंडी कंस का वध
शहर में रविवार को 268 वर्ष पुरानी परंपरा का निर्वहन किया गया। कंस दशमी के अवसर पर रात 12 बजे गवली समाजजनों द्वारा लाठियों से पीटकर कंस के पुतले का वध किया गया। इसके पहले सोमवारिया बाजार में देव और दानवों के बीच वाकयुद्ध का आयोजन किया गया। इसमें देव और दानवों का किरदार निभा रहे कलाकारों ने ज्वलंत मुद्दे भी उठाए।
कोरोना गाइड लाइन का पालन करते हुए इस वर्ष यह आयोजन किया गया कंस वधोत्सव समिति के संयोजक तुलसीराम भावसार ने बताया कंस वधोत्सव के चलते रात 10 बजे से सोमवारिया बाजार में देव और दानवों का रूप धरे कलाकारों के बीच वाकयुद्ध शुरू हुआ। दानव ने अपने संवादों से लोगों को रोमांचित कर दिया।
इसी बीच राक्षसी अट्टाहस देर शाम से लेकर रात 12 बजे तक गूंजायमान रहे। सैकड़ों लोग सोमावारिया बाजार में देर रात तक डटे रहे। इसके बाद रात 12 बजे गवली समाज के युवा सोमवारिया बाजार स्थित कंस चौराहा पर कंस दरबार में पहुंचे और भगवान श्रीकृष्ण का जयघोष लगाते हुए कंस के पुतले का डंडो और लाठियों से पीट-पीटकर वध कर दिया और सोमबारिया बाजार से घसीटते हुए नई सड़क पर ले गए।